बिम्सटेक क्या है और यह UPSC के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में, बिम्सटेक (BIMSTEC) यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन बनकर उभरा है। यह संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों को जोड़ता है और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक प्रगति और सामरिक संतुलन को बढ़ावा देना है। बिम्सटेक के उद्देश्य, संरचना, और भारत की भूमिका को समझना UPSC सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से करेंट अफेयर्स और GS पेपर 2 के लिए।
BIMSTEC क्या है?
UPSC परीक्षा की दृष्टि से बिम्सटेक क्या है। यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। BIMSTEC एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देश शामिल हैं, जो बंगाल की खाड़ी के आसपास स्थित हैं। सदस्य देश निम्नलिखित हैं:

- बांग्लादेश
- भारत
- म्यांमार
- श्रीलंका
- थाईलैंड
- नेपाल
- भूटान
ये देश दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करते हैं और बंगाल की खाड़ी के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। BIMSTEC का लक्ष्य सामान्य हित के कई क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से साझा और तीव्र विकास को प्राप्त करना है।
भौगोलिक और आर्थिक महत्व
- BIMSTEC क्षेत्र की जनसंख्या लगभग 1.68 अरब है, जो विश्व की कुल जनसंख्या का 22% है।
- इन देशों की सम्मिलित GDP लगभग 3.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
- बंगाल की खाड़ी वैश्विक शिपिंग और व्यापार मार्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह संगठन हिमालय और बंगाल की खाड़ी की पारिस्थितिकीय तंत्र को जोड़ता है और सांस्कृतिक, आर्थिक तथा रणनीतिक दृष्टिकोण से इन देशों को एक साथ लाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बिम्सटेक क्या है, यह समझने के लिए उसके इतिहास को जानना जरूरी है।

- 1997: इसे BIST-EC (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के रूप में बैंकॉक घोषणा के माध्यम से स्थापित किया गया।
- 1997 में बाद में: म्यांमार जुड़ा और नाम बदलकर BIMST-EC हो गया।
- 2004: नेपाल और भूटान की सदस्यता के बाद इसे BIMSTEC नाम दिया गया।
इस संगठन की स्थापना SAARC की निष्क्रियता के चलते क्षेत्रीय सहयोग की एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में की गई थी।
मुख्य उद्देश्य
BIMSTEC का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय एकीकरण और विकास के लिए बहु-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
प्रमुख लक्ष्य:
- क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति को तेज करना।
- सामान्य हित के क्षेत्रों में सहयोग और परस्पर सहायता को बढ़ावा देना।
- तकनीकी और आर्थिक सहायता के माध्यम से एक-दूसरे की सहायता करना।
- क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना।
- गरीबी को कम करना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
संगठनात्मक संरचना
BIMSTEC एक संरचित संस्थागत व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करता है:
- शिखर सम्मेलन: सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों/सरकार प्रमुखों द्वारा आयोजित।
- मंत्रिस्तरीय बैठकें: विदेश मंत्रियों की बैठकें।
- वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें: नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए।
- कार्य समूह और विशेषज्ञ समूह: विशिष्ट क्षेत्रों पर कार्य।
- स्थायी सचिवालय: ढाका, बांग्लादेश में स्थित; 2014 में स्थापित।
सहयोग के क्षेत्र
प्रारंभ में BIMSTEC ने 6 प्राथमिक क्षेत्रों को चिह्नित किया था। बाद में इन्हें बढ़ाकर 14 क्षेत्र कर दिया गया। इनमें शामिल हैं:

- व्यापार और निवेश
- परिवहन और संचार
- ऊर्जा
- पर्यटन
- तकनीकी
- मत्स्य पालन
- कृषि
- सार्वजनिक स्वास्थ्य
- गरीबी उन्मूलन
- आतंकवाद और संगठित अपराध विरोधी
- पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
- सांस्कृतिक सहयोग
- जन-सामान्य संपर्क
- जलवायु परिवर्तन
2022 में इन्हें समेकित कर 7 मुख्य क्षेत्रों में विभाजित किया गया:
मुख्य क्षेत्र | नेतृत्वकारी देश |
---|---|
व्यापार, निवेश और विकास | बांग्लादेश |
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन | भूटान |
सुरक्षा और आतंकवाद विरोध | भारत |
कृषि और खाद्य सुरक्षा | म्यांमार |
जनसंपर्क | नेपाल |
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार | श्रीलंका |
कनेक्टिविटी | थाईलैंड |
हाल ही में BIMSTEC चर्चा में क्यों है?
1. BIMSTEC चार्टर का अंगीकरण (2022)
- 5वें BIMSTEC शिखर सम्मेलन में अंगीकृत हुआ।
- इस चार्टर से BIMSTEC को कानूनी पहचान और औपचारिक ढांचा प्राप्त हुआ।
- भारत ने मार्च 2024 में चार्टर को अनुमोदित किया।
2. BIMSTEC परिवहन कनेक्टिविटी मास्टर प्लान
- भूमि, समुद्र और वायु मार्गों के माध्यम से सदस्य देशों को जोड़ने की योजना।
- प्रमुख परियोजनाएं:
- भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग
- कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट परियोजना
3. BIMSTEC ऊर्जा केंद्र
- भारत के बेंगलुरु में प्रस्तावित।
- ऊर्जा सहयोग और ग्रिड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने का उद्देश्य।
4. आतंकवाद विरोधी सहयोग
- क्षेत्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग आदि के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई।
5. जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन
- BIMSTEC मौसम एवं जलवायु केंद्र (नोएडा, भारत): डेटा साझाकरण और पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित कर रहा है।
भारत के लिए BIMSTEC का महत्व
रणनीतिक महत्व
- दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है।
- एक्ट ईस्ट नीति और पड़ोसी प्रथम नीति को मजबूती देता है।
- SAARC का प्रभावी विकल्प।
आर्थिक महत्व
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा।
- क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करता है।
- प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन तक पहुंच।
सुरक्षा संबंधी महत्व
- आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और संगठित अपराध से निपटने के लिए मंच।

भारत द्वारा BIMSTEC में किए गए प्रमुख प्रयास
- आपदा प्रबंधन अभ्यास (DMEx) – आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना।
- नोएडा स्थित BIMSTEC मौसम एवं जलवायु केंद्र – डेटा और मौसम पूर्वानुमान साझा करना।
- BIMSTEC स्टार्टअप सम्मेलन – नवाचार और स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा।
- MILAN नौसैनिक अभ्यास – बंगाल की खाड़ी में नौसैनिक सहयोग।
BIMSTEC को लेकर चुनौतियां
- राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी – कुछ देश अन्य समूहों को प्राथमिकता देते हैं।
- बुनियादी ढांचे की कमी – कमजोर परिवहन व्यवस्था।
- परियोजनाओं में देरी – राजनीतिक अस्थिरता (जैसे म्यांमार)।
- सदस्यता ओवरलैप – ASEAN और BIMSTEC दोनों में सदस्यता से ध्यान बंटता है।
- वित्तीय कमी – कोई स्वतंत्र विकास बैंक नहीं।
आगे की संभावनाएं
- FTA (मुक्त व्यापार समझौता) को शीघ्र अंतिम रूप देना।
- विकास निधि की स्थापना।
- डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था में सहयोग।
- शैक्षणिक एवं युवा आदान-प्रदान को बढ़ावा।
- जलवायु परिवर्तन अनुकूलन तकनीक पर संयुक्त अनुसंधान।
SAARC बनाम BIMSTEC तुलना
विशेषता | SAARC | BIMSTEC |
स्थापना वर्ष | 1985 | 1997 |
सदस्य देश | 8 (पाकिस्तान सहित) | 7 |
सचिवालय | काठमांडू, नेपाल | ढाका, बांग्लादेश |
वर्तमान स्थिति | निष्क्रिय | सक्रिय |
प्रमुख बाधा | भारत-पाक संबंध | कोई नहीं |
नैतिकता और सुशासन दृष्टिकोण
- क्षेत्रीय सहयोग वैश्विक न्याय को बढ़ावा देता है।
- आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग अंतर-निर्भरता की नैतिकता दर्शाता है।
- BIMSTEC समावेशी शासन, सतत विकास और क्षेत्रीय शांति के लिए एक मंच है।
दिन की प्रेरणादायक पंक्ति
“क्षेत्रीय सहयोग अब एक विकल्प नहीं, बल्कि वैश्वीकृत विश्व की आवश्यकता है।”
निष्कर्ष
अब हम स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं कि बिम्सटेक क्या है, इसका उद्देश्य क्या है, और भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है। BIMSTEC एक ऐसा क्षेत्रीय संगठन बन चुका है जो विकास, संपर्क और सहयोग के लिए एक समावेशी और व्यावहारिक मंच प्रदान करता है। BIMSTEC चार्टर के अंगीकरण के बाद यह एक कानूनी पहचान वाला संगठन बन गया है, जिससे भविष्य में इसके और प्रभावशाली होने की संभावना है। भारत के लिए BIMSTEC सिर्फ एक कूटनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अनिवार्यता है जो क्षेत्रीय स्थिरता और नेतृत्व को सुनिश्चित कर सकता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए संभावित प्रश्न
- “BIMSTEC दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक परिवर्तनकारी पहल बन सकता है।” चर्चा करें।
- SAARC की तुलना में BIMSTEC के उद्देश्य और प्रदर्शन की विवेचना करें।
- भारत की एक्ट ईस्ट और पड़ोसी प्रथम नीति में BIMSTEC की भूमिका की समीक्षा करें।
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